उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर ज़िले में 24 जून की शाम एक दलित महिला से कथित 'छेड़खानी' के बाद उस परिवार को गाड़ी
से कुचले जाने की बात कही जा रही.
इस घटना में पीड़ित परिवार की दो महिलाओं की मौत हो गई है. वहीं, परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से ज़ख़्मी हैं.स्थानीय पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करके अभियुक्त नकुल ठाकुर को गिरफ़्तार कर लिया है.
हालांकि, घटना के वक़्त उसके साथ गाड़ी में मौजूद तीन अन्य युवक फरार चल रहे हैं.
इस परिवार ने अभियुक्त नकुल सिंह को उनके घर की दीवार पर पेशाब करते हुए देखा जिसका संतो देवी और उर्मिला ने विरोध किया.
इस पर नकुल ने कथित तौर पर परिवार की महिला सदस्यों के ख़िलाफ़ अपशब्दों का प्रयोग किया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इसके बाद परिवार के सदस्यों और नकुल के बीच कहासुनी हुई. इसी दौरान नकुल ने अंजाम भुगतने की धमकी दी.
वहीं, पीड़िता के मुताबिक़, जब वह अपने घर की ओर लौट रहे थे तभी नशे में धुत युवक ने उसके साथ छेड़छाड़ करने का प्रयास किया जिसका विरोध करने पर झगड़ा हुआ.
पीड़ित परिवार का कहना है कि छेड़छाड़ का विरोध करने पर उन्हें धमकी मिली. इसके कुछ देर बाद उसने उन लोगों पर गाड़ी चढ़ा दी.
इसमें रामवीर सिंह की पत्नी सत्यवती और भीमसेन की पत्नी उर्मिला की मौत हो गई है. इसके साथ ही रामवीर के बेटे जितेंद्र समेत एक अन्य व्यक्ति को गंभीर चोटें आई हैं.
बुलंदशहर पुलिस एसएसपी एन कोलांचि कहते हैं, "इस मामले में महिला ने पहले एक्सीडेंट का मामला दर्ज कराया था. इसके बाद जाम लगाकर इसे छेड़खानी और हत्या की शिकायत दी है. हमने एफ़आईआर में इन धाराओं को जोड़ दिया है. इनमें हत्या, हत्या की कोशिश और छेड़खानी की धाराएं शामिल हैं."
"महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि अभियुक्त ने गाड़ी में बैठने को कहा. वहीं, अभियुक्त नकुल ठाकुर का कहना है कि वे लोग जा रहे थे और ये लोग (पीड़ित परिवार के सदस्य) अचानक से बीच सड़क में आ गए. इसका सीसीटीवी फुटेज़ भी मौजूद है, जिसमें नकुल की बात दिखाई पड़ती है. हालांकि, उसमें छेड़खानी का मामला नज़र नहीं आता है. मुक़दमा लिख दिया गया है और आगे जांच में हम देखेंगे."
इस घटना के बाद बुलंदशहर ज़िले में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं.
परिजनों के मरने से ग़स्साए पीड़ित परिवार और आम लोगों ने पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते हुए एनएच 91 जाम कर दिया.
स्थानीय पुलिस को भीड़ को तितर बितर करने में बल प्रयोग का इस्तेमाल करना पड़ा है.
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के
एक नेता ने स्थानीय लोगों के दबाव में कटमनी के तौर पर ली गई 2.28 लाख रुपए की रक़म मंगलवार को लौटा दी.
यह घटना बीरभूम जिले के सिउड़ी की है.
स्थानीय लोगों ने टीएमसी नेता से कटमनी वापस करने की मांग में सुबह एक सालिसी सभा यानी पंचायत का आयोजन किया था. स्थानीय भाषा में कटमनी उस रकम को कहा जाता है जो सत्तारुढ़ पार्टी के नेता सरकारी परियजोनाओं के लिए आवंटित रकम में से कमीशन के तौर पर लेते हैं. उसी में गांव वालों से सादे काग़ज पर हस्ताक्षर कराने के बाद उन्होंने प्रति व्यक्ति 1,617 रुपए के हिसाब से 141 लोगों को इस रक़म का भुगतान कर दिया.
स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाक़े में एक निकासी नाला बनाने के लिए सौ दिनों के काम योजना के तहत 2.28 लाख रुपए मंजूर किए गए थे. वह काम तो पूरा हो गया. लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अंचल अध्यक्ष त्रिलोचन मुखर्जी ने पूरी रक़म दबा ली थी. कटमनी विवाद के उबरने के बाद गाँव वालों ने उनका घेराव किया था. उसके बाद मंगलवार सुबह सालिसी सभा बुलाई गई थी. उसी सभा में मुखर्जी ने वह रक़म लौटाई.
हालांकि मुखर्जी इसे कटमनी मानने को तैयार नहीं हैं. वो कहते हैं, "सौ दिनों के रोज़गार योजना के तहत नाले के निर्माण के लिए आवंटित रक़म कुछ तकनीकी वजहों से अब तक बाँटी नहीं जा सकी थी. अब जिन लोगों ने काम किया था उनको रक़म दे दी गई है." उन्होंने इस मुद्दे पर इससे ज़्यादा बात करने से इनकार कर दिया.